अक्षरछाया

उन्मुक्त

सोचता हूँ 
तोड़ दूं 
सारे धागे
हो लूं 
उन्मुक्त

डर  है
कहीं...
पा न लूं 
अबाध गति 
अनियंत्रित

at मार्च 27, 2011 कोई टिप्पणी नहीं:
इसे ईमेल करेंइसे ब्लॉग करें! X पर शेयर करेंFacebook पर शेयर करेंPinterest पर शेयर करें
Labels: कविता, नरेन्द्र कुमार
नई पोस्ट पुराने पोस्ट मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें संदेश (Atom)

परिचय

अक्षरछाया हिंदी साहित्य को समझने की एक मामूली कोशिश है।
संपादन – नरेन्द्र कुमार
संपर्क :
ईमेल – narendrapatna@gmail.com
  • अंतिम अरण्य - आंतरिक दुनियाओं का पारदर्शी यथार्थ : योगेंद्र कृष्णा
    निर्मल वर्मा का उपन्यास ‘अंतिम अरण्य’ बीसवीं सदी की तरफ से इक्कीसवीं सदी की किवाड़ पर एक आत्मीय दस्तक की तरह था, जिसे हिंदी साहित्य ...
  • दिव्या विजय : सामाजिक परिवर्तन और साहित्य (तीसरा भाग)
    दिव्या विजय मानती हैं कि अपने समकालिकों को पढ़ना इसलिए जरूरी है क्योंकि समकालीन साहित्य सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया से जुड़ा होता है। सामाजि...
  • अंगूठा
    सरकार कहती है योजनाओं की पहुंच पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति तक हो पंक्ति में खड़ा अंतिम व्यक्ति अपनी अंगुली पर नीली स्याही का निशा...
  • प्रतिदान
    घोड़े सरपट दौड़ते हैं और तेज..!   गिरते हैं, उठते हैं दूसरों को पछाड़ कुछ गंतव्य तक पहुंचते हैं प्रशिक्षित करके अंत में गदहों की सेवा मे...
  • प्रेमिका या माँ
    तुम मिली इन गर्मियों में सड़क पर छतरी लिए धूल और पसीने पोंछती कुछ परेशान-सी इंतजार करती मुझे याद आ गये वे दिन ढूंढने लगा वह मुस्कान ...
  • गुनाहों का देवता : स्मिता सिन्हा
    हिंदी साहित्य में 'गुनाहों का देवता' एक ऐसी कृति है, जो अपने प्रकाशन के समय से आजतक पाठकों का प्यार पाती आई है। धर्मवीर भारत...
  • संदीप मील की कहानी ' कोकिलाशास्त्र '
    पिछली बार कब आपने कोई कहानी कहानीकार की ज़ुबानी सुनी है? अगर सुनी है तो क्या उनकी कहानी में 'किस्सागोई' अथवा 'कहन' अस्ति...
  • पत्थर और बहता पानी : निर्मल वर्मा
    निर्मल वर्मा हिंदी कथा–साहित्य एवं कथेत्तर गद्य के अद्भुत सर्जक हैं। उन्होंने गद्य की सभी विधाओं में लिखा। वरिष्ठ आलोचक नामवर सिंह उनकी कह...
  • कुच्ची का कानून या मनु का विधान
    शुरू में ही स्पष्ट कर दूं कि यह प्रसिद्ध कहानीकार शिवमूर्ति रचित लघु उपन्यास ‘कुच्ची का कानून’ की न तो आलोचना है न ही समीक्षा। बस इसकी कथा...
  • कहानियों की तरह हैं उनके चेहरे : श्रीधर करुणानिधि
    श्रीधर करुणानिधि एक कवि होने के साथ ही आलोचक एवं कहानीकार भी हैं । उनका पहला कविता-संग्रह है 'खिलखिलाता हुआ कुछ' । आये दिन द...

सभी पन्ने

  • ►  2026 (2)
    • ►  जुलाई (1)
    • ►  जनवरी (1)
  • ►  2025 (1)
    • ►  दिसंबर (1)
  • ►  2024 (2)
    • ►  जुलाई (1)
    • ►  फ़रवरी (1)
  • ►  2023 (4)
    • ►  सितंबर (3)
    • ►  अगस्त (1)
  • ►  2022 (1)
    • ►  मई (1)
  • ►  2021 (2)
    • ►  जुलाई (2)
  • ►  2020 (6)
    • ►  अगस्त (2)
    • ►  जुलाई (2)
    • ►  अप्रैल (1)
    • ►  फ़रवरी (1)
  • ►  2019 (10)
    • ►  दिसंबर (1)
    • ►  अक्टूबर (2)
    • ►  सितंबर (1)
    • ►  अगस्त (1)
    • ►  जुलाई (1)
    • ►  अप्रैल (2)
    • ►  जनवरी (2)
  • ►  2018 (15)
    • ►  दिसंबर (4)
    • ►  सितंबर (2)
    • ►  जुलाई (1)
    • ►  जून (1)
    • ►  मई (3)
    • ►  मार्च (1)
    • ►  फ़रवरी (1)
    • ►  जनवरी (2)
  • ►  2017 (31)
    • ►  दिसंबर (3)
    • ►  नवंबर (2)
    • ►  अक्टूबर (3)
    • ►  सितंबर (2)
    • ►  जुलाई (6)
    • ►  जून (6)
    • ►  मई (3)
    • ►  मार्च (3)
    • ►  फ़रवरी (2)
    • ►  जनवरी (1)
  • ►  2016 (38)
    • ►  दिसंबर (2)
    • ►  नवंबर (7)
    • ►  अक्टूबर (13)
    • ►  सितंबर (4)
    • ►  अगस्त (2)
    • ►  जून (2)
    • ►  मई (2)
    • ►  अप्रैल (6)
  • ►  2015 (16)
    • ►  सितंबर (11)
    • ►  जून (1)
    • ►  जनवरी (4)
  • ►  2014 (4)
    • ►  दिसंबर (2)
    • ►  नवंबर (2)
  • ▼  2011 (3)
    • ▼  मार्च (1)
      • उन्मुक्त
    • ►  जनवरी (2)
  • ►  2010 (6)
    • ►  सितंबर (1)
    • ►  अप्रैल (1)
    • ►  मार्च (1)
    • ►  फ़रवरी (1)
    • ►  जनवरी (2)
  • ►  2009 (6)
    • ►  दिसंबर (2)
    • ►  अक्टूबर (1)
    • ►  सितंबर (3)

लेबल

  • अंतिम अरण्य
  • अज्ञातवास की कविताएँ
  • अनिल अविश्रांत
  • अनिला राखेचा
  • अरुण नारायण
  • अविनाश मिश्र
  • अस्मुरारी नंदन मिश्र
  • आप–बीती
  • आयाम
  • आर्टिकल 15
  • आलेख
  • आलोक रंजन
  • आवाज भी देह है
  • आशीष सिंह
  • उत्कर्ष
  • उलझी यादों के रेशम
  • एल सी टी घाट
  • कविता
  • कविता के विरुद्ध
  • कहानी
  • कुच्ची का कानून
  • कुमार श्याम
  • कोकिलाशास्त्र
  • क्रिस्टेनिया मेरी जान
  • गंगा
  • ग़ज़ल
  • गीताश्री
  • गुनाहों का देवता
  • गौरव पाण्डेय
  • चाहत अन्वी
  • चित्रा मुद्गल
  • जमीन अपनी तो थी
  • जीवन क्या जिया
  • डॉ. रोहिणी अग्रवाल
  • तारानंद वियोगी
  • दिव्या विजय
  • दूजी मीरा
  • दूसरा शनिवार
  • दौड़
  • धर्मसंकट
  • नज़्म
  • नताशा
  • नरेन्द्र कुमार
  • निबंध
  • निर्मल वर्मा
  • निवेदिता झा
  • नैनीताल
  • पटना
  • परितोष कुमार 'पीयूष'
  • पाठकनामा
  • पुनपुन और अन्य कविताएँ
  • प्रज्ञा
  • प्रज्ञा सिंह
  • प्रत्यूष चन्द्र मिश्रा
  • प्रभात प्रणीत
  • प्रश्नकाल
  • प्रियंका ओम
  • प्रीति प्रकाश
  • बदलता गाँव
  • बलमा जी का स्टूडियो
  • भावना शेखर
  • मणि मोहन
  • मनुस्मृति
  • मनोहर श्याम जोशी
  • ममता विश्वनाथ
  • मैनेजर पांडेय
  • मोनिका जैन ‘पंछी’
  • यात्रा-वृतांत
  • योगेन्द्र कृष्णा
  • रपट
  • रवीन्द्र भारती
  • राखी सिंह
  • राजकमल चौधरी
  • राजू सारसर 'राज'
  • रामनगर
  • राहुल सांकृत्यायन
  • लोकराग
  • लोकार्पण
  • वक्तव्य
  • वाइन कलर
  • विजय कुमार
  • विद्या भूषण
  • विनय सौरभ
  • विनीता परमार
  • वृतांत
  • वो अजीब लड़की
  • शिवमूर्ति
  • श्रद्धा थवाईत
  • श्रीधर करूणानिधि
  • संजय कुमार 'कुंदन'
  • संजय कुमार शांडिल्य
  • संजू शब्दिता
  • संदीप मील
  • संस्मरण
  • समीक्षा
  • समीर परिमल
  • साक्षात्कार
  • सिनीवाली
  • सुरेन्द्र स्निग्ध
  • सुशील कुमार भारद्वाज
  • सोनी पांडेय
  • स्मिता सिन्हा
  • स्वाति बरनवाल

कुल पेज दृश्य

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
नरेन्द्र कुमार
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
नरेन्द्र कुमार. ऑसम इंक. थीम. Blogger द्वारा संचालित.