तू-तू मैं-मैं
तू-तू मैं-मैं में
न तुम थे
न मैं था
बस...
दोनों की जिद थी
दोनों का भय था
कुत्ते
राजतिलक की तैयारी थी
करो या मरो की बारी थी
बाघों के पिंजरे खोल दिये
जनता भयभीत भागी
मालिक ने पुचकारा
सबने दुम हिलाई
नई पोस्ट
पुराने पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
संदेश (Atom)