युगों पहले...
शांत थी सारी दुनिया
मंथर गति से चलायमान था जीवन
प्रकृति नहीं थी संतुष्ट
रचना कर श्रेष्ठ जीव की
दे दिये सभी गुण
दे न पाई आपसी विश्वास
दुनिया बदलती गई
दिन लंबे होते गए
रास्ते बन गये आकाश में
झुक गये पहाड
तोड़े जाने लगे
नश्वरता के नियम
गतिमान हो गया जीवन
बढ़ने लगी अशांति
मूक बनी प्रकृति
हर दुःख को सहती रही
बचपना है, गुजर जाएगा
इंतजार करती रही
सदियां गुजरती गई
शांति भटकती रही
होते रहे...
समझौते के लिए युद्ध
युद्ध के लिए समझौते
बँटी हुई दुनिया
आज भी भाग रही है
शांति की ओर..!