उनके तिरुपति और अजमेर की
त्वरित यात्राओं को देखकर
होने लगा है मुझे विश्वास
...कि वहीं मिलते होंगे अधिकारपत्र
हत्या,अपहरण और घोटालों के
तभी तो हर आरोपमुक्ति के बाद
पुर्नदर्शनार्थ जाते हैं
...कि काले धन के चढ़ावों के बदले
होते होंगे नवीनीकरण
उनके अधिकारपत्रों के
तभी तो उनके वापसी पर
लोग और आतंकित होते हैं
Sunday, February 7, 2010
Tuesday, January 19, 2010
नई पहचान
कितने पड़ोसी गोलियों से मारे गए
कितने हवाई हमलों से
कोई हिसाब नहीं
हमलावर ही गिन रहे हैं
हर नए हमलों के साथ
एक जनसमूह ख़त्म
जो ढूंढ रहा था
किसी खंडहर में आश्रय
चूल्हे सुलगा रहीं औरतें
जन्म दिन मना रहे बच्चे
निशाने बनते
हमलावरों के
और गिने जाते
आतंकियों में
मरने के बाद
यहाँ भी है
वैसे ही हालात
यहाँ भी फौजें
ढूंढती हैं आतंकी
एक दिन हमारे यहाँ भी
पहुचेंगी
जब हम चर्चा कर रहे होंगे
पड़ोस के
पकड़ ले जाएँगे
शहर के किसी सुनसान कोने में
दाग कर पीठ पर गोलियां
दे देंगे हमें नई पहचान
उन्हें मिलेंगे पदक
वीरता के
और हम अपनी बेबसी पर
फिर चर्चा कर रहे होंगे
अपने घरों में
कितने हवाई हमलों से
कोई हिसाब नहीं
हमलावर ही गिन रहे हैं
हर नए हमलों के साथ
एक जनसमूह ख़त्म
जो ढूंढ रहा था
किसी खंडहर में आश्रय
चूल्हे सुलगा रहीं औरतें
जन्म दिन मना रहे बच्चे
निशाने बनते
हमलावरों के
और गिने जाते
आतंकियों में
मरने के बाद
यहाँ भी है
वैसे ही हालात
यहाँ भी फौजें
ढूंढती हैं आतंकी
एक दिन हमारे यहाँ भी
पहुचेंगी
जब हम चर्चा कर रहे होंगे
पड़ोस के
पकड़ ले जाएँगे
शहर के किसी सुनसान कोने में
दाग कर पीठ पर गोलियां
दे देंगे हमें नई पहचान
उन्हें मिलेंगे पदक
वीरता के
और हम अपनी बेबसी पर
फिर चर्चा कर रहे होंगे
अपने घरों में
Thursday, January 7, 2010
प्रवासी भारतीय
प्रवासी भारतीयों में
भारत को ढूंढना
कहाँ तक सही
कितना सफल
याद है हमें
मुंबई सम्मलेन
एक प्रतिनिधि के
हिन्दी में बोलने पर
हुआ था काफी विरोध
माफी मांगनी पड़ी थी
आयोजकों को
सारा औचित्य ही
धरा रह गया
अपमानित हुई थी मां
एक बार फिर
सिर उठाए
हंस रहे थे अंग्रेज
भारत को ढूंढना
कहाँ तक सही
कितना सफल
याद है हमें
मुंबई सम्मलेन
एक प्रतिनिधि के
हिन्दी में बोलने पर
हुआ था काफी विरोध
माफी मांगनी पड़ी थी
आयोजकों को
सारा औचित्य ही
धरा रह गया
अपमानित हुई थी मां
एक बार फिर
सिर उठाए
हंस रहे थे अंग्रेज
Thursday, December 31, 2009
स्कूल में
स्कूल में
स्वेटर बुनती हुई
शिक्षिका
कह रही थी-
परिश्रम
सच्चे मन से
होनी चाहिए
सह शिक्षक
बैठे
उंघ रहे थे
स्वेटर बुनती हुई
शिक्षिका
कह रही थी-
परिश्रम
सच्चे मन से
होनी चाहिए
सह शिक्षक
बैठे
उंघ रहे थे
Sunday, December 20, 2009
अमरबेल का अमरत्व
खत्म हो जाता है पेड़
अमरबेल नहीं
मौसम की मार से
पूरी तरह बेअसर
उसे परवाह नहीं
मृदा-क्षय,जल तथा
पोषक तत्वों की कमी की
सब पेड़ की जरुरते हैं
उसे तो चाहिए
केवल पेड़ का संचित जीवद्रव्य
किसी भी कीमत पर
अनवरत,असीमित वृद्धि के लिए
अमरबेल के आलिंगन की
कीमत चुकाते हैं पेड़
धीरे-धीरे क्षय होकर
नष्ट हो जाना नीयति है
पर शोषक अमरबेल
मृत पेड़ के अवशेष पर
दूसरे जीवित का आश्रय लेकर
बचा लेता है
अपना अमरत्व
अमरबेल नहीं
मौसम की मार से
पूरी तरह बेअसर
उसे परवाह नहीं
मृदा-क्षय,जल तथा
पोषक तत्वों की कमी की
सब पेड़ की जरुरते हैं
उसे तो चाहिए
केवल पेड़ का संचित जीवद्रव्य
किसी भी कीमत पर
अनवरत,असीमित वृद्धि के लिए
अमरबेल के आलिंगन की
कीमत चुकाते हैं पेड़
धीरे-धीरे क्षय होकर
नष्ट हो जाना नीयति है
पर शोषक अमरबेल
मृत पेड़ के अवशेष पर
दूसरे जीवित का आश्रय लेकर
बचा लेता है
अपना अमरत्व
Monday, December 7, 2009
सेंसेक्स और माँ
सेंसेक्स का संवेदी सूचकांक
और
बूढ़ी तथा अशक्त माँ की
उखड़ती साँसें
दोनों कितनी समान
दोनों का उतार-चढाव
कितना जोखिम भरा
बस इतना सा फर्क
सेंसेक्स पर हर सेकेंड नजर है
(संवेदी जो है)
लेकिन माँ
अंधेरे और एकांत में
उपेक्षित
नजर कैसे आएगी
वो किसी वेवसाइट या टीवी पर
दिख भी नहीं रही है
और
बूढ़ी तथा अशक्त माँ की
उखड़ती साँसें
दोनों कितनी समान
दोनों का उतार-चढाव
कितना जोखिम भरा
बस इतना सा फर्क
सेंसेक्स पर हर सेकेंड नजर है
(संवेदी जो है)
लेकिन माँ
अंधेरे और एकांत में
उपेक्षित
नजर कैसे आएगी
वो किसी वेवसाइट या टीवी पर
दिख भी नहीं रही है
संसदीय चुनाव परिणाम के
ताजे आँकड़ों के साथ
खबरिया चैनलों की
सनसनीखेज खबर आती है
सेंसेक्स ने आठ सौ अंकों का
गोता लगाया
अच्छा भला सोमवार
ब्लैक मंडे बन गया
फोन लाइनें हो गई हैं व्यस्त
भावी प्रधानमंत्री का आश्वासन
कुछ दिनों में
बाजार पूर्ववत हो जाएगा
साहब चिंतित,शोकमग्न
पत्नी और बच्चे परेशान
टीवी पर
बाजार के विशेषज्ञों की राय
जारी है
ब्रेक के बाद
इन कोलाहलों से दूर
माँ की सांसें भी उखड़ रही
गोता लगाने को तैयार
उम्मीद की कोई किरण नहीं
पर आँखें दरवाजे पर जमी हुई
शायद अभी भी है इंतजार
किसी चिंतित,शोकमग्न
परेशान चेहरे की।
ताजे आँकड़ों के साथ
खबरिया चैनलों की
सनसनीखेज खबर आती है
सेंसेक्स ने आठ सौ अंकों का
गोता लगाया
अच्छा भला सोमवार
ब्लैक मंडे बन गया
फोन लाइनें हो गई हैं व्यस्त
भावी प्रधानमंत्री का आश्वासन
कुछ दिनों में
बाजार पूर्ववत हो जाएगा
साहब चिंतित,शोकमग्न
पत्नी और बच्चे परेशान
टीवी पर
बाजार के विशेषज्ञों की राय
जारी है
ब्रेक के बाद
इन कोलाहलों से दूर
माँ की सांसें भी उखड़ रही
गोता लगाने को तैयार
उम्मीद की कोई किरण नहीं
पर आँखें दरवाजे पर जमी हुई
शायद अभी भी है इंतजार
किसी चिंतित,शोकमग्न
परेशान चेहरे की।
Friday, November 20, 2009
हमारे सपने उनके सपने
हमें अब सपने नहीं आते हैं
हमारे पास रात नही है
हमारी रातें खरीदकर
वे अपने सपने पूरे करते हैं
हमारे पास रात नही है
हमारी रातें खरीदकर
वे अपने सपने पूरे करते हैं
Subscribe to:
Posts (Atom)


