Sunday, February 7, 2010

शंकित मन

उनके तिरुपति और अजमेर की
त्वरित यात्राओं को देखकर     
होने लगा है मुझे विश्वास  
...कि वहीं मिलते होंगे  अधिकारपत्र
हत्या,अपहरण और घोटालों के
तभी तो हर आरोपमुक्ति के बाद
पुर्नदर्शनार्थ जाते हैं

...कि काले धन के चढ़ावों के बदले
होते होंगे नवीनीकरण
उनके अधिकारपत्रों के
तभी  तो उनके वापसी पर
लोग और आतंकित होते हैं  

Tuesday, January 19, 2010

नई पहचान

कितने पड़ोसी गोलियों से मारे गए
कितने हवाई हमलों से
कोई हिसाब नहीं
हमलावर ही गिन रहे हैं

हर नए हमलों के साथ
एक जनसमूह ख़त्म
जो ढूंढ रहा था
किसी खंडहर में आश्रय

चूल्हे सुलगा रहीं औरतें
जन्म दिन मना रहे बच्चे
निशाने बनते
हमलावरों के
और गिने जाते
आतंकियों में
मरने के बाद

यहाँ भी है
वैसे ही हालात
यहाँ भी फौजें
ढूंढती हैं आतंकी
एक दिन हमारे यहाँ भी
पहुचेंगी
जब हम चर्चा कर रहे होंगे
पड़ोस के
पकड़ ले जाएँगे
शहर के किसी सुनसान कोने में
दाग कर पीठ पर गोलियां
दे देंगे हमें नई पहचान
उन्हें मिलेंगे पदक
वीरता के
और हम अपनी बेबसी पर
फिर चर्चा कर रहे होंगे
अपने घरों में

Thursday, January 7, 2010

प्रवासी भारतीय

प्रवासी भारतीयों में
 भारत को ढूंढना
कहाँ तक सही
कितना सफल 

याद है हमें
मुंबई सम्मलेन
एक प्रतिनिधि के
हिन्दी में बोलने पर
हुआ था काफी विरोध
माफी मांगनी पड़ी थी
आयोजकों  को

सारा औचित्य ही
धरा रह गया
अपमानित हुई थी मां
एक बार फिर
सिर उठाए
हंस रहे थे अंग्रेज

Thursday, December 31, 2009

स्कूल में

स्कूल में
स्वेटर बुनती हुई
शिक्षिका
कह रही थी-
परिश्रम
सच्चे मन से
होनी चाहिए
सह शिक्षक
बैठे
उंघ रहे थे

Sunday, December 20, 2009

अमरबेल का अमरत्व

खत्म हो जाता है पेड़
अमरबेल नहीं
मौसम की मार से
पूरी तरह बेअसर
उसे परवाह नहीं
मृदा-क्षय,जल तथा
पोषक तत्वों की कमी की
सब पेड़ की जरुरते हैं
उसे तो चाहिए
केवल पेड़ का संचित जीवद्रव्य
किसी भी कीमत पर
अनवरत,असीमित वृद्धि के लिए

अमरबेल के आलिंगन की
कीमत चुकाते हैं पेड़
धीरे-धीरे क्षय होकर
नष्ट हो जाना नीयति है
पर शोषक अमरबेल
मृत पेड़ के अवशेष पर
दूसरे जीवित का आश्रय लेकर
बचा लेता है
अपना अमरत्व

Monday, December 7, 2009

सेंसेक्स और माँ


सेंसेक्स का संवेदी सूचकांक 
और 
बूढ़ी तथा अशक्त माँ की 
उखड़ती साँसें 
दोनों कितनी समान 
दोनों का उतार-चढाव 
कितना जोखिम भरा 
बस इतना सा फर्क 
सेंसेक्स पर हर सेकेंड नजर है 
(संवेदी जो है) 
लेकिन माँ 
अंधेरे और एकांत में 
उपेक्षित  
नजर कैसे आएगी 
वो किसी वेवसाइट या टीवी पर 
दिख भी नहीं रही है
संसदीय चुनाव परिणाम के 
ताजे आँकड़ों के साथ 
खबरिया चैनलों की  
सनसनीखेज खबर आती है 
सेंसेक्स ने आठ सौ अंकों का 
गोता लगाया 
अच्छा भला सोमवार 
ब्लैक मंडे बन गया 
फोन लाइनें हो गई हैं व्यस्त 
भावी प्रधानमंत्री का आश्वासन 
कुछ दिनों में 
बाजार पूर्ववत हो जाएगा 
साहब चिंतित,शोकमग्न 
पत्नी और बच्चे परेशान 
टीवी पर 
बाजार के विशेषज्ञों की राय 
जारी है 
ब्रेक के बाद

इन कोलाहलों से दूर  
माँ की सांसें भी उखड़ रही 
गोता लगाने को तैयार 
उम्मीद की कोई किरण नहीं 
पर आँखें दरवाजे पर जमी हुई 
शायद अभी भी है इंतजार 
किसी चिंतित,शोकमग्न 
परेशान चेहरे की।


Friday, November 20, 2009

हमारे सपने उनके सपने

हमें अब सपने नहीं आते हैं
हमारे पास रात नही है
हमारी रातें खरीदकर
वे अपने सपने पूरे करते हैं