सेंसेक्स और माँ

सेंसेक्स का संवेदी सूचकांक
और
बूढ़ी तथा अशक्त माँ की
चढ़ती-उतरती साँसे
दोनों कितनी समान
दोनों का उतार-चढ़ाव
कितना जोखिम भरा !
बस इतना-सा फर्क
सेंसेक्स पर हर सेकंड नजर है
( संवेदी जो है )
लेकिन माँ ...
अंधेरे और एकांत में
उपेक्षित...
नज़र कैसे आएगी
वो किसी वेवसाइट या चैनल पर
दिख भी नहीं रही है

दुःख की शुरुआत

मुझे वहीं जाना होगा 
जहाँ अपनों को छोड़ा था


जिन्हें अपना समझा
वे जा रहे हैं 
सुख को जीने 
मुझे छोड़कर


परंपरा जो बन चुकी है 
उससे पता नहीं
कितनों के सुख बटेंगे
इतना तय है 
दुःख कभी न बाँटे जाएँगे।